पश्चिम बंगाल चुनाव: जब पूर्व हाईकोर्ट जज का नाम ही वोटर लिस्ट से हुआ गायब! चुनाव आयोग ने सप्लीमेंट्री लिस्ट में किया सुधार

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में मतदान का अधिकार सबसे बड़ा हथियार है। लेकिन क्या हो जब किसी राज्य के उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश का नाम ही मतदाता सूची से गायब कर दिया जाए? पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग (ECI) की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, अब इस मामले में सुधार कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

अप्रैल-मई 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत 28 फरवरी 2026 को जारी की गई शुरुआती मतदाता सूची में कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस साहिदुल्लाह मुंशी (Justice Sahidullah Munshi) और उनके परिवार के सदस्यों के नाम ही काट दिए गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस मुंशी ने इस त्रुटि को उठाया था। उन्होंने बताया कि स्क्रूटनी (जांच) प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल होने और सभी आवश्यक दस्तावेज पेश करने के बावजूद उनका और उनके परिवार का नाम शुरुआती सूची में शामिल नहीं किया गया था।

सप्लीमेंट्री लिस्ट में मिली जगह

शिकायत और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद, 27 मार्च 2026 को चुनाव आयोग द्वारा एक सप्लीमेंट्री लिस्ट (पूरक सूची) जारी की गई। इस नई सूची में संशोधन करते हुए जस्टिस मुंशी और उनके परिवार के सदस्यों के नामों को वापस मतदाता सूची (Electoral Roll) में जोड़ दिया गया है।

कौन हैं जस्टिस साहिदुल्लाह मुंशी?

जस्टिस मुंशी न्यायिक जगत का एक जाना-माना नाम हैं। उन्हें वर्ष 2013 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायपालिका में 7 साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद, वे सितंबर 2020 में सेवानिवृत्त (Retire) हुए थे। वर्तमान में, जस्टिस मुंशी पश्चिम बंगाल में ‘बोर्ड ऑफ औकाफ’ (Board of Auqaf) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश (कानूनी पहलू)

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया से लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर कई चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। एक स्वतंत्र अपीलीय तंत्र (Independent Appellate Mechanism) की कमी को देखते हुए, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश जारी किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम काटे जाने (Exclusions) के खिलाफ अपीलों की सुनवाई के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunals) का गठन किया जाए। इन ट्रिब्यूनलों में उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और पूर्व न्यायाधीशों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की निष्पक्ष सुनवाई हो सके।


निष्कर्ष:

एक पूर्व न्यायाधीश का मतदाता सूची से नाम कटना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर डेटा संकलन में कितनी बड़ी चूक हो सकती है। आम नागरिकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि यदि मतदाता सूची से आपका नाम अनुचित तरीके से कट जाता है, तो चुनाव आयोग की पुनरीक्षण प्रक्रिया और ट्रिब्यूनल के माध्यम से इसे वापस जुड़वाने का कानूनी अधिकार आपके पास सुरक्षित है।


आज का सवाल (आपके लिए): क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद व्यस्क मताधिकार (Adult Suffrage) की गारंटी देता है?

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  • एडवोकेट तन्वी सिंह न्यायपालिका और अपराध जगत की खबरों पर अपनी पैनी नज़र रखने के लिए जानी जाती हैं। अदालती फैसलों (Judgments), पुलिस नियमावली और एफआईआर (FIR) से जुड़ी प्रक्रियाओं को कवर करने में उनका वर्षों का अनुभव है। तन्वी का काम नवीनतम कानूनी अपडेट्स को सबसे पहले और सबसे सटीक तरीके से पाठकों तक पहुँचाना है। उनके लेखों में तथ्यात्मक शुद्धता और कानूनी बारीकियों का बेजोड़ संगम देखने को मिलता है।

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